चुम्बन : दांतों का खेल


वो एक कातिलाना,
अंदाज रखती हैं,
मेरे लहू की,
एक प्यास रखती हैं.
लोग कहते हैं जिसे मोहब्बत,
उस शम्रो-हया के पीछे जाने,
वो क्या -क्या ख़्वाब रखती हैं.
वो टकराती हैं राहों में,
अपना दुप्पट्टा लहरा के.
हम अपनी नजरे झुका के चलें,
तो भी शरीफ नहीं।
अपनी शराफत के पीछे जाने,
वो कैसे-कैसे नकाब रखती हैं.
दांतों का खेल है,
चुम्बन मोहब्बत में,
तभी तो बुड्ढों पे वो,
खिलखिला के हंसती हैं.
हम जैसे जवानों की जल रही है,
हसरते कुवारीं।
और ओठों की अपने ही दाँतो से,
वो दबा के रखती हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

Kissing your partner has no meaning if your teeth are not involved in that.

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