गुरु – गजानन


अगर गुरु जी आप ना होते,
तो, पूरब से पश्चिम,
उत्तर से दक्क्षिण तक,
हम भटकते।
दुनिया की ठोकरों,
से झुलसते, और
कुण्ठाग्रसित हो कर,
हम धधकते।
आशा के विपरीत है,
धुरंधर सिंह का जीवन,
मगर हर सफलता के,
आप ही हो गजानन।