कमल को पुलकित कर देंगे


हम हर तस्वीर को बदल देंगें,
सबकी तकदीर को बदल देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
कण-कण में कमल को पुलकित कर देंगे।
वो जो कहतें हैं की मेरी छवि दागदार है,
उनके गिरेवान में देखिये, कितने आस्तीन के साँप हैं.
हम दिन के ही नहीं, बल्कि उनके रातों के गुनाह को भी,
सरे आम, उजागर कर देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
जन्नत – से -जहन्नुम तक की सब राहें समतल कर देंगे।
हम योगी ही नहीं, वैरागी भीं है,
कण-कण में कमल को पुलकित कर देंगे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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ना चरण – स्पर्श करों


ना प्रेम करों,
ना उपहास करों।
नारी तो देवी है,
पर,
ना चरण – स्पर्श करों।
ये तो माँ का सम्मान है,
ना माँ का नारी से तुलना करों।
माँ तो शक्ति हैं, माँ तो सत्य हैं,
माँ साक्षात् ब्रह्म है,
बस माँ का ही बंदन करों।

 

परमीत सिंह धुरंधर

मेरी नजर में तू एक गुनाहगार दिखता है


तेरा हर रिश्ता,
मुझे रात के अंधेरों में,
किया हुआ एक गुनाह लगता है.
जमाना तुम्हे चाहे जो कहे,
मान ले, लिख दे,
या समझ के समझाने लगे.
मेरी नजर में तू हमेशा,
एक गुनाहगार दिखता है.
तू जो हर किस्सा बेचता है,
डमरुं के ताल पे.
जो अपने ख़्वाबों के,
अधीन हो के विवश हैं,
उनको नचाता हैं,
तू अपने धुन पे.
गर्वान्वित हो कर,
चाहे तू खुद को चाहे जितना भी महान,
मानता है.
मेरी नजर में तू आज भी, तब भी,
एक गुनाहगार दिखता है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कलम भी मौन रह गए


किसानों की ऐसी – की – तैसी करके,
गांधी की पार्टी चल रही है मुस्करा के.
झंडा उठा दिया है सत्ता के खिलाफ,
बस बीफ के मुद्दे को मुद्दा बना के.
दलितों के कपड़े फाड़ कर उनको,
नंगा कर दिया पुलिश वालो ने.
मोदी के मौन के खिलाफ,
साहित्य अकादमी आवार्ड लौटाने वाले,
कलम भी मौन रह गए,
हरिजनों के इस दमन पे.

परमीत सिंह धुरंधर

Arvind Kejriwaal and his dream about Delhi


Today, Delhi CM Mr. Arvind Kejriwaal disclosed the reason of his success in Delhi’s election. He told us that he likes history even if he is from IIT. He has learned many things by reading Indian history. He used that knowledge and made people fool in Delhi’s election. He told that one couldn’t capture Delhi without cheating Delhites. For example, Gori cheated Prithviraj Chauhan, Babar cheated Ibrahim Lodi, and British also captured Delhi by cheating.

Moreover, he told that you could not rule India if you could not cheat Delhite. He also revealed his future dreams as a politician that he wants to do. He will reduce the power of judiciary and will bring it under state government. He further explained the benefit of such action. He explained that this would stop people running from lower court to higher court. The poor or common people, the AAM AADMI, don’t have money or time to run from lower court to apex court, from state to center. Thus, they can directly come to him and he will give the judgment. He told “ आम आदमी क्या चाहता है? राहत, जल्दी मिलने वाली राहत। प्यास लगने पे वो शरबत नहीं चाहता, उसे पानी चाहिए.” He told, “these people from our judiciary can not understand the problem of AAM AADMI and thus their judgments are not as per the expectation of AAM AADMI. He told “ आप देखिये, सलमान खान को जल्दी निर्णय नहीं चाहिए तो कोर्ट निर्णय नहीं ले रही. क्यों की सलमान खान आम आदमी नहीं हैं. उनकी जरूरते अलग हैं.”

Further, he told that he is going to demand to shut down all IITs and IIMs once his daughter will pass out from IIT. The reason is obvious that he and his family could teach everyone through SKYPE and no one has to pay big money for education in IIT. He told, “ It’s a conspiracy by all political parties to convert AAM AADMI into non-AAM AADMI to keep AAM AADMI out from the power.” He will not allow this to happen any more. He will provide free IIT degree by using SKYPE, Google hangout and thus we don’t need IIT buildings and professors. The first IIT where he will experiment his idea will be IIT Delhi. His dream is to give free IIT degree to every one from Delhi, thus to make Delhi as the first state with maximum number of IITian.

This is written for fun.  Don’t take seriously.

Parmit Singh Dhurandhar

राममनोहर लोहिया: हमारा भी हक़ है


हम वीरों की धरती के,
वाशिंदे हैं.
हम कारिंदे नहीं,
जो यूँ पगार लें.
इस धरती पे,
हमारा भी हक़ है.
हम कोई पंक्षी नहीं,
जो यूँ आहार लें.
तुम्हे अगर नहीं है स्वीकार,
हमारी समानता,
तो ये तुम्हारी मज़बूरी है.
हम कोई फ़कीर नहीं,
जो अपने पेट पे प्रहार लें.

परमीत सिंह धुरंधर

राममनोहर लोहिया: मैं टकराता चलूँगा


यूँ ही जुल्म को मिटाता चलूँगा,
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम सत्ता के जिस सिहासन पे बैठो हो,
मैं उसकी जड़ों को हिलाता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हारे वादे झूठे, दिखावे और फरेब हैं,
मैं जन-जन को ये बताता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हे अगर भूख है गरीबों के लहूँ की,
तो मैं तुम्हारी बागों को उजाड़ता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।
तुम्हे गुरुर है जिन गुलाबों के प्रेम पे,
जब तक सांस हैं तन में,
मैं इन गुलाबों को सुखाता चलूँगा।
ए सत्ताधीशों,
सुन लो, मैं टकराता चलूँगा।

परमीत सिंह धुरंधर