राखी


एक छोटे से मंदिर में,
एक छोटे से बच्चे के,
नन्हे हाथों पे,
प्रेम के दो धागे,
बाांध के बहना बोली।
की, भूल न जाना भैया,
उठा के मेरी डोली।

परमीत सिंह धुरंधर

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