मोदी :अविश्वास प्रस्ताव-2018 (part 2)


माँ
जमाना देखेगा
मेरे रंग को
जब मैं रंग दूंगा
तेरे आँचल को.

अभी तो बहुत पड़ाव
आने बाकी हैं
जहाँ पड़ेंगीं मुझको गालियाँ।
मगर हर पड़ाव पे
जमाना झुकेगा
तेरे चरणों में.

उन्हें धीरज इतना भी नहीं
की मेरे जाने का इंतज़ार कर लें.
वो जिन्हे सिर्फ सोने -जवाहरात
लगाने का शौक है अपने तन से.
वो मुझे गले लगाएं या ना लगाएं
उन्हें एक दिन लगाना होगा
तेरी माटी को अपने तन – मन से.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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मोदी :अविश्वास प्रस्ताव-2018


जो धरा को अब भी अपना धरोहर हमझते हैं
वो जान लें की अब सत्ता पे मोदी बैठें है.
आसान नहीं है उन्हें उठा देना
वो जो आसान पे सम्पूर्ण तपो बल से बैठें हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मेरी नजर में तू एक गुनाहगार दिखता है


तेरा हर रिश्ता,
मुझे रात के अंधेरों में,
किया हुआ एक गुनाह लगता है.
जमाना तुम्हे चाहे जो कहे,
मान ले, लिख दे,
या समझ के समझाने लगे.
मेरी नजर में तू हमेशा,
एक गुनाहगार दिखता है.
तू जो हर किस्सा बेचता है,
डमरुं के ताल पे.
जो अपने ख़्वाबों के,
अधीन हो के विवश हैं,
उनको नचाता हैं,
तू अपने धुन पे.
गर्वान्वित हो कर,
चाहे तू खुद को चाहे जितना भी महान,
मानता है.
मेरी नजर में तू आज भी, तब भी,
एक गुनाहगार दिखता है.

 

परमीत सिंह धुरंधर