मीरा


कहाँ मेरे कान्हा,
कहाँ हो कन्हैया,
प्यासी मेरी धरती,
प्यासी हैं मीरा।
गैयन के संग,
मैं भी,
उदाश हूँ खड़ी।
सुनी इस बगिया में,
कहाँ हैं बंसी तेरी।
कहाँ मेरे बंधू,
कहाँ हो कन्हैया,
प्यासी मेरी धरती,
प्यासी हैं मीरा।
चादर भी तन से,
गिरा के मैं हूँ आयी,
पयाल भी पथ में,
कही टूट गयी मेरी।
कांटो से छलनी,
है पग मेरे,
फिर भी आँखों में,
प्रेम छलकाती हूँ आयी।
कहाँ मेरे सखा,
कहाँ हो रचैया,
प्यासी मेरी धरती,
प्यासी हैं मीरा।
दो पल जरा नैनों,
से मेरे पी लो,
दो पल जरा,
बंसी तो बजा दो.
लोक-लाज, शर्म-भय,
सब।
बहती गंगा में,
बहा के हूँ आयी.
कहाँ मेरे प्रेमी,
कहाँ हो रसैया,परमीत
प्यासी मेरी धरती,
प्यासी हैं मीरा।

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