प्रेम -मदिरा


प्रेम अदृश्य होता है,
पर, दृश्यों को बदल देता है.
जिन्हे नहीं पता,
पेड़ – पौधों की प्रजातियां।
फूल – पत्तियों को किताबों में,
वो भी संजोते हैं.
मदिरा दृश्य है,
पर, सबको अदृश्य कर देता है.
जिन्हे नहीं पता,
अक्षरों का, उनके मूल्यों का.
वो भी, मंदिरों में, समाज में,
मेले में, अमूल्य प्रवचन देते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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