बीमार – सास


पायल छनकअता रात- रात भर,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
टूट गइल शर्म के सारा दीवार,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
मायका से आईल बा चिठ्ठी,
घरे बुलावाव तारी माई।
लिखदअ बालम तनी ई जवाब,
बीमार बारी सास हमार।
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
पायल छनकअता रात- रात भर,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।
टूट गइल शर्म के सारा दीवार,
बालम अइसन बा तहार ई प्यार।

परमीत सिंह धुरंधर

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अगस्त 22


प्रेम में ये पहला पत्र लिखा है,
प्रिये तुम्हे मैंने अपना प्राण लिखा है.
शब्द मत समझना इन्हे कलम के,
मैंने साक्षात इसमें अपना ह्रदय रखा है.
तुम्हारी कमर पे हरपल झूलती,
वो चोटी मेरे ह्रदय की वीणा हैं.
जिसे मैंने तुमसे दूर इस शहर में,
अब तक हर एक पल में झंकृत रखा है.
प्रेम में ये पहला पत्र लिखा है,
प्रिये तुम्हे मैंने अपना प्राण लिखा है.
हर सुबह,
तुम्हारी केसुओं से जो छनती थी बुँदे,
मैंने उसे, विरहा के इस तपते रेगिस्तान में भी,
अपनी पलकों में संजोये रखा हैं.
प्रेम में ये पहला पत्र लिखा है,
प्रिये तुम्हे मैंने अपना प्राण लिखा है.
सब कुछ निपटा के, हर दीपक बुझा के,
जब तुम कमरे में आती थी एक दिया जला के,
मैंने आज तक, जीवन के हर निराशा में,
असफलता में, उसकी लौ को अपने सीने में,
प्रज्जवलित रखा है।
प्रेम में ये पहला पत्र लिखा है,
प्रिये तुम्हे मैंने अपना प्राण लिखा है.

 

परमीत सिंह धुरंधर