राणा सांगा


किस्मत से बड़ी है मेहनत,
मेहनत से बड़ा है जज्बा।
हम हारकर भी न बैठेंगे,
ये कह रहा हैं सांगा।
हम लड़ते रहेंगे,
हम बढ़ते रहेंगे।
किस्मत बदले या न बदले,
रुख नहीं बदलेगा ये सांगा।
बंधना मुझे स्वीकार नहीं,
और झुकना मेरा स्वाभिमान नहीं।
जब तक न मिलेगी मंजिल,
यूँ ही भटकता रहेगा सांगा।
मेरा हौसला मेरे साथ है,
कोई साथ आये या नहीं।
मोहब्बत मुझे है यूँ हिन्द से,
की अकेला भिड़ता रहेगा दुश्मनों से सांगा।

परमीत सिंह धुरंधर

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ए हिन्द तुझे सजाऊंगा मैं


ए हिन्द,
तुझे सजाऊंगा मैं.
इसलिए नहीं की तू मेरा है,
बल्कि इसलिए की तू अनोखा है.
दिव्यज्योति है तू इस संसार का,
चमकता है तुझसे ही,
भाल मानवता का.
ए हिन्द,
तुझे सवारूँगा मैं.
इसलिए नहीं की तू अकेला है.
बल्कि इसलिए की तू अलबेला है.
चाँद है तू जीवन के आसमान का,
बिन तेरे अंधेरो में है हर जहाँ।
ए हिन्द,
तुझे सम्भालूंगा मैं.
इसलिए नहीं की मुझे लालच है कोई,
बल्कि इसलिए की तू मेरा गर्व है.
तुझे छोड़ के चाहे जितने भी चले जाए,
दूर किसी के दामन में बसने।
जितने भी चाहे, इल्जाम लगा लें,
अहिषुण्ता का तुझपे।
ए हिन्द,
लौट के आऊंगा मैं.
इसलिए नहीं की मेरा कोई आसरा नहीं है.
बल्कि इसलिए की मुझे तू प्यारा बहुत है.

परमीत सिंह धुरंधर