बिहार के दोनों लाल ऐसे


एक का नाम Aftab है,
और एक का नाम Crassa.
बिहार के दोनों लाल ऐसे,
कहीं भी जमा दें तमाशा।

एक का नाम Vipul है,
और एक का नाम Raman.
बिहार के दोनों लाल ऐसे,
साथ चलें तो जैसे नर-नारायण।

एक का नाम Rajesh Prasad है,
और एक का नाम Vimal Kishor।
बिहार के दोनों लाल ऐसे,
छाँट दे अँधेरा और कर दे भोर.

 

परमीत सिंह धुरंधर

तीनो बदमाश एक साथ है


एक है खत्री, और एक आफताब है,
दोनों के आँखों में मेरा ही ख्वाब हैं.
तो कैसे सम्भालूँ जोबन रसिया,
Crassa के मुंह से भी टपकsता लार है.
एक ही बार में टूट जाते है,
चोली के सारे बटन मेरे.
ऐसा इनकी आँखों का कमाल है.
तो कैसे सम्भालूँ चुनर रसिया,
जब तीनो बदमाश एक साथ है.

 

परमीत सिंह धुरंधर

कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?


कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।
किसी की लगा दें,
किसी की सुलगा से.
पल भर में ही,
किसी की भी दुनिया हिला दें.
इनके आगे तो सबकी है फट्टी पड़ी.
कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।
कितनो का मान धोया,
कितनो का इंद्रा रोया।
कितने चौबों को,
दुबे बना के छोड़ दिया।
किसी की शान्ति, किसी की भ्रान्ति,
इनके आगे तो है मिटी सबकी।
कुत्तों – कमीनों की भीड़ कैसी?
Khattri, Crassa, आफताब जैसी।

 

परमीत सिंह धुरंधर

गमें – रात का इंतज़ाम


गमें – रात का हम कुछ यूँ इंतज़ाम करते हैं,
यारों की टोली, हुस्न वालों के किस्से,
कबाब और हाथों में जाम रखते हैं.
गम क्या करें जिंदगी की कोई साथ नहीं है,
हम तो हर रात तुझे जीने का नया ख़्वाब रखते हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

चार-सहेलिया


राते आइलन हमर बलमुआ, चाँद पे तेल लगा के,
अंग-अंग हिला गइलन, हमके भांग पिला के.
राते आइलन हमर बलमुआ, अंखिया के ऐनक तुड़ा के,
भौजी के झूला गइलन, मुखड़ा हमार बता के.
राते आइलन हमर बलमुआ, दारु पे दारु चढ़ा के,
सारा माल लूट लेहलन, पड़ोसी के रसोई में जाके.
राते आइलन हमर बलमुआ, मुह में पान चबा के,
सउँसे देहिया लाल कइलन, हमके गुलाब बता के.

परमीत सिंह धुरंधर