कोयल से बोला काग रे


मधुर – मिलान की आस में,
कोयल से बोला काग रे.
कभी तो आके बैठ ज़रा,
मेरी इस डाल पे.
तू भी तो देख जरा आके,
कितना यहाँ सूनापन,
और कितनी मुझमे तेरी प्यास रे.
मधुर – मिलान की आस में,
कोयल से बोला काग रे.
तू भी काली, मैं भी काला,
फिर भी दुनिया तुझको पूजती।
छल लेती है हर बार तू मुझे,
फिर भी जग को सच्ची तू ही दिखती।
कभी तो समझ इस दिल को तू,
ये कितना अकेला और बेताब रे.
मधुर – मिलान की आस में,
कोयल से बोला काग रे.

 

परमीत सिंह धुरंधर

अभी रहे दी घोंसला में


ऐसे मत चलाईं राजा जी,
गुलेल तान – तान के.
की छोट बिया चिड़ाइया,
अभी रहे दी घोंसला में.
कब तक रही चिड़ाइया,
रानी ई घोंसला में.
आज उड़े द, ले लेव इहो
मजा खुलल आसमा के.

 

परमीत सिंह धुरंधर

चिड़ियाँ


चिड़ियाँ उड़ाने का शौक रखने वालों,
संभल जाओ,
अब शिकारी हो गयी हैं चिड़ियाँ।
घोंसलों में कहाँ ठहरती हैं,
की अब बड़ी आधुनिक हो गयी हैं चिड़ियाँ।
अपने पंखो को संभल के रखती हैं,
पराएं पंखो पे सवार होक उड़ती हैं चिड़ियाँ।
चिड़ियाँ पालने का शौक रखने वालों,
संभल जाओ,
अब चालाक हो गयी हैं चिड़ियाँ।
दाना चुगते – चुगते अब चुग,
जाती हैं इंसान भी चिड़ियाँ।

 

परमीत सिंह धुरंधर