बाबा जागार्जुन की याद में


आवो महारानी हम उठाएंगे पालकी (बाबा जागार्जुन की पंक्ति),
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की ((बाबा जागार्जुन की पंक्ति).
जिस तन पे तुमने चाबुक बरसाई थी,
जिन साँसों को दी, अँधेरी कोठरी।
उसी तन पे, चन्दन लगा के,
उन्ही साँसों से उतारेंगे तेरी आरती।
आवो महारानी हम उठाएंगे पालकी,
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.
तेरे गोर तन के आगे,
कहाँ काली हमारी काया।
कागज़ में स्वतंत्र हैं,
पर मन पे तेरी ही छाया।
तेरे चरणों को पखारेगी,
स्वयं भगत सिंह की माँ.
और शहीदों की बेवाएं,
लगाएंगी तेरे जयकार की बोली।
आवो महारानी हम उठाएंगे पालकी,
ये ही आज्ञा हुई है जवाहर लाल की.

परमीत सिंह धुरंधर