कुत्तों की एक भीड़ लग गयी शहर में


कुत्ते कुछ इस कदर भोकें,
बिल्लियाँ सहम गयी सारे सहर में.
और खेल भी देखो जनाब हड्डियों का,
उसने इस कदर फेंकी हड्डियां,
की कुत्तों की एक भीड़ लग गयी शहर में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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दिल्ली में बिल्ली


दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.
मैंने खिलाया उसे भर पेट दूध-भात,
खुद ही काटी खली पेट जारी की रात.
पर वो भी निकली कमबख्त बदजात,
मुझ गरीब आशिक को ही लात मार गयी.
दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.
कितना हम में था प्यार भरा,
कितनी रातों को हमने साथ काटा.
देख के एक मोटा-ताजा बिलाड़,
सब कुछ एक पल में सब भुला गयी,
मुझ गरीब आशिक़ पे ही आँखे अपनी तान गयी.
दिल्ली शहर में मेरी बिल्ली भी भाग गयी,
ऐसी भागी वैसी भागी दुनिया पूरी जान गयी.

 

परमीत सिंह धुरंधर

बिल्ली


 

Image

बिल्लियों के बीच में खेलती हैं,
बिल्लियों से बनके वो,
कभी आँख लड़ती,
तो कभी आँख चुराती वो.
चलती है इधर- उधर,
अदावों से इतराते हुए,
कभी छज्जे पे बैठी,
कभी आँगन,
में जलवे बिखराती वो.
इक पल में ही हज़ारो,
रंग उतर आते हैं, आँखों में,
कभी रातों में सजती,
कभी ठुमके लगाती वो, परमीत