मेरे सैया


मेरे सैया के नखरे हज़ार,
पियर धोती पे आएं हैं ससुराल।
सास से मांगे हैं हीरा-मोती,
साली-सरहज में दिल है बीमार।
ससुर से है रूसा-रुस्सवल,
और साल से करते हैं खिलवाड़।
मेरे सैया के नखरे हज़ार,
बीच आँगन में करते हैं मुझको परेशान।
मेरे सैया के नखरे हज़ार,
पियर धोती पे आएं हैं ससुराल।

परमीत सिंह धुरंधर

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