राणा सांगा


किस्मत से बड़ी है मेहनत,
मेहनत से बड़ा है जज्बा।
हम हारकर भी न बैठेंगे,
ये कह रहा हैं सांगा।
हम लड़ते रहेंगे,
हम बढ़ते रहेंगे।
किस्मत बदले या न बदले,
रुख नहीं बदलेगा ये सांगा।
बंधना मुझे स्वीकार नहीं,
और झुकना मेरा स्वाभिमान नहीं।
जब तक न मिलेगी मंजिल,
यूँ ही भटकता रहेगा सांगा।
मेरा हौसला मेरे साथ है,
कोई साथ आये या नहीं।
मोहब्बत मुझे है यूँ हिन्द से,
की अकेला भिड़ता रहेगा दुश्मनों से सांगा।

परमीत सिंह धुरंधर

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राणा सांगा


सरे आम बेबसी का रोना ही क्या,
जब जंग होगी तो अंगों का खोना ही क्या।
जब तक प्राण हैं, भींचता रहूँगा तलवारों को,
बिना हरे जख्मों के सांगा की जवानी ही क्या।
लड़ूंगा, लड़ता रहूँगा,
इन बालू के कणों को लहूँ से सींचूंगा।
कुछ उगे या न उगे इस धरती से,
पर बिना परिश्रम के फसलों का लहलहाना ही क्या।

परमीत सिंह धुरंधर