मशाल


ए सितारों बरसना सीखो,
बादलों से मेरी जंग छिड़ चुकी है.
अब वो नहीं बरसेंगे मेरी जमीन पे,
और मैं नहीं विचरने दूंगा उन्हें,
अपनी सरहदों पे.
ए सितारों गरजना सीखो,
बिजली से मेरी जंग छिड़ चुकी है.
वो गरजेगी हमारी सरहदों में,
डराने को हमें.
हम भी ललकारेंगे उसे,
अपनी जमीन पे मशाल जला के.

परमीत सिंह धुरंधर

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