भारत-रत्न और रामचन्द्र गुहा का इतिहास


बिहार के दूर -दूर के गावों में, आज भी रात को जब कोई माँ अपने रोते हुए बच्चे को दूध पिलाती है, तो कहती है “जल्दी – जल्दी पी के बड़ा हो जा, तुझे पढ़ने BHU भेजूंगी।” और रामचन्द्र गुहा कहते है की पंडित मदन मोहन मालवीया जी का योगदान रविन्द्र नाथ टैगोर से काम हैं. बिहार की कोई माँ टैगोर तो दूर शांतिनिकेतन का नाम भी नहीं सुनी है. रामचन्द्र गुहा के अनुसार मानव का शरीर और जीवन प्रमुख योग्यता है, ना की उसका कर्म, भारत रतन प्रुस्कार को प्राप्त करने के लिए.

परमीत सिंह धुरंधर

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