दूध


रफ़्तार मेरी बढ़ती जा रही है,
पर सांस है की उखड़ती नहीं है.
जाने माँ ने कैसे दूध पिलाया है,
दुश्मनो के बीच में भी,
मेरी आवाज दबती नहीं है.

परमीत सिंह धुरंधर

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