इश्क़ में ईद


इश्क़ में ईद हम भी मना ले,
कभी कोई चाँद तो निकले।
होली में रंग तो सभी,
खेल लेते है चेहरा छुपाके।
इश्क़ में दिवाली हम भी मना ले,
कोई एक दिया तो जलाये आँगन में.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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दिवाली और दाल


कलेजा चीर देहलू तू ऐसे मुस्का के,
अब धोती मत फाड़ दअ, देह – से देह लगाके।
सारा थाती चल गइल,
ई दाल 250 रुपया किलो खरीदे में,
अब साड़ी मत मांगे लगियह,
करवा – चौथ आ दिवाली तू बता के.

परमीत सिंह धुरंधर

दिवाली


वो दिवाली भी अकेली थी,
ये दिवाली भी अकेली गुजरी है.
तुम न होती जो ज्वाला गुट्टा,
तो जिंदगी की हर दिवाली अधूरी है.

परमीत सिंह धुरंधर

दिवाली


आज दिवाली में बलम जी,
मुझे चाहिए नए झुमके.
और जलाऊँगी दिए,
आपके संग घूम- घूम के.
आज दिवाली में बलम जी,
मैं जाउंगी मायके।
और जलाऊँगी दिए,
सखियों संग सज-सवर के.

परमीत सिंह धुरंधर