दिवाली और दाल


कलेजा चीर देहलू तू ऐसे मुस्का के,
अब धोती मत फाड़ दअ, देह – से देह लगाके।
सारा थाती चल गइल,
ई दाल 250 रुपया किलो खरीदे में,
अब साड़ी मत मांगे लगियह,
करवा – चौथ आ दिवाली तू बता के.

परमीत सिंह धुरंधर

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250 रूपये किलो दाल


क्या लिखूं तेरे हुस्न पे मेरी जान,
जब से देखा है बेचने लगा हूँ,
250 रूपये किलो दाल.
अब तो सोच लिया है,
फिर से शुरू करूंगा खेती।
बादलों ने भी संदेसा भेजा है,
खूब बरसेंगे मेरी खेतो में,
अब जो रोपूंगा धान.
क्या लिखूं तेरे हुस्न पे मेरी जान,
जब से देखा है बेचने लगा हूँ.

परमीत सिंह धुरंधर