जश्न


बढे चलो यूँ ही मेरे दोस्त,
जीवन पथ पे.
हर पल में पाओगे हमें,
कदम – से – कदम मिलाते.
हर उतार-चढ़ाव में,
मेरा कन्धा और हाथ हैं तुम्हारे लिए.
और हर जश्न में मैं मिलूंगा,
तुम्हारे साथ जाम उठाये.

परमीत सिंह धुरंधर

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