छपरा


वीरो की धरती है छपरा,
बलिदानों की गाथा है छपरा।
जब – जब सूरज को बादलों ने ढका है,
तो आँधियों की दास्ताँ हैं छपरा।
गंगा – घाघरा के पावन तट,
पे बसा है चित्रगुप्त -बिखारी ठाकुर का छपरा।
राजेन्द्र बाबु, लोकनायक, महामाया प्रसाद
भारत का पूरा इतिहास है छपरा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

छपरा


वो भगवा ही क्या जिसमे रंग न छपरा से हो,
वो मिट्टी ही क्या जिसपे कोई वीर न छपरा से हो.
वो हुस्न ही क्या जिसका कोई आशिक न छपरा से हो,
वो वीर ही क्या जिसने जीता दिल न छपरा से हो.
वो राजनीति ही क्या जिसकी धुरी न छपरा से हो,
वो सत्ता ही क्या जिसपे बैठा न कोई छपरा से हो.

 

परमीत सिंह धुरंधर

मथुरा-छपरा


सैया के बाहों में बा ऐसा नशा,
की लूट गयील मथुरा,
पर आइल मजा.
जब दोनों तरफ से तीर चले लागल,
तो धधक गईल छपरा,
पर आइल मजा.

परमीत सिंह धुरंधर