अब तेरे पाँवों में बेड़िया नहीं, खनकती चूड़ियाँ हैं


सितारों से भी जयादा तन्हाई लिए हूँ,
एक उदासी सी बैठ गयी है जिंदगी में,
तेरे जाने के बाद.
मैं आज तक वो दर्द, वो बेबसी,
वो गहराई लिए हूँ.
जवानी तो उसी दिन ढल गयी,
कहानी भी जिंदगी की खत्म हो गयी,
जब तूने राहें बदल लीं.
मैं तो आज तक वो निशाँ तेरे क़दमों के,
संजोएं बैठा हूँ.
साँसे तो है, बस सिसकती हुई,
तेरे लौट आने की आस लगाये।
इन्हे कौन बताये?
की अब तेरे पाँवों में बेड़िया नहीं,
खनकती चूड़ियाँ हैं.
मैं आज भी ये राज इनसे,
छुपाये बैठा हूँ.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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