की जब तक हैं गुरु गोबिंद सिंह जी


भारत को जीत कर भी,
तुम कभी जीत नहीं पाओगे।
हम राजपूतों – जाट -मराठों को,
तुम कभी बाँध नहीं पाओगे।
तुम चाहे तोप बरसा लो,
या हमपे हाथी दौड़ा लो.
रणभूमि में तुम हमें,
कभी पछाड़ नहीं पाओगे।
तानसेन के छंदों पे,
जितना भी वीर बनले अकबर।
राणा की बरछी का,
सामना नहीं कर पाओगे।
सुन लो ए मुगलों,
चाहे भाइयों को भाई से लड़ा लो.
मगर कभी अकबर को ना,
रणभूमि में उतार पाओगे।
हम हारकर भी, झुक जाए,
मिट जाए, अगर किसी दिन.
पर सिक्खों की बस्ती में,
तुम लोहा ना उठा पाओगे।
की जब तक हैं गुरु गोबिंद सिंह जी,
ए मुगलों,
तुम कभी भारत न जीत पाओगे।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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