तुम जरा जो धीरे से चल दो


तुम जरा जो धीरे से चल दो,
मेरी सांसें मेरा साथ दे दे l
बस इतना कहना जो तुम मानो,
मेरे दिल में भी मौजे उमंग हो l
ना चाहत है मोहब्बत की तुमसे,
ना आरजू पास आने की l
मौत के दर पे खड़ा हूँ,
और क्या सजा है दिवाली की l
तुम जुल्फों का कफ़न जो पहना दो,
मेरी मौत भी दुल्हन बन सज संवर ले l
तुम जरा जो धीरे से चल दो,
मेरी सांसें मेरा साथ दे दे l
ये शर्मो हया ये कमसिन अदा,
तेरा हुस्न ऐ जालिम सारे जहाँ में है जुदा l
तुम जरा जो काजल लगा लो आँखों में,
मेरा दर्द भी कहीं छुप ले l
जाते जाते हमें इस जहाँ से
वो मंजर तो दिखला दो l
घुघंट उठ रहा हो तुम्हारा,
शर्म से पलके जड़ गई हो l
तुम जरा जो ऐसे संवार लो,
मेरी धड़कने भी मोहब्बत कर ले l
तुम जरा जो धीरे से चल दो,
मेरी सांसें मेरा साथ दे दे l
बुरा न मानो इस दिल का,
ये तो प्रेम का मारा हुआ है l
देख के हुस्न को तुम्हारे,
चित इसका भी बदला हुआ है l
तुम जरा मित्रता कर लो,
ये परमीत भी मनमीत बन ले l
तुम जरा जो धीरे से चल दो,
मेरी सांसें मेरा साथ दे दे l

These lines were written in 2004 during my interview for the post of Scientist C at BARC, Mumbai.

परमीत सिंह धुरंधर

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