संसार


तुम मिले तो ख्वाब बने,
बन गया पूरा संसार।
और कोसिस की जो तुम्हे पाने की,
तो एक -एक कर, टूटा हर ख्वाब।
तुमने छल लिया नैनों से,
जाम छलका- छलका के.
तुम मिले तो प्यास जगी,
जग गयी पूरी हर रात.
और कोसिस की तुझे पीने की,
तो एक -एक कर, टूटा हर जाम.
तू बलखाई, तू अंगराई,
तू शरमाई हर रंग में.
और जो कोसिस की तुझे,
थामने की,
तो मिट गया हर प्यार।

 

परमीत सिंह धुरंधर

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