तीन – तलाक


बेइंतहा मोहब्बत का मेरे,
उसने कुछ ऐसे सिला दिया।
निकाह के दो – सेकेण्ड के बाद ही,
तीन – तलाक पढ़ दिया।
शौहर होने का सुख भी,
मुझे नसीब नहीं हुआ.
उसने वो खिताब सेज पे,
किसी और को दे दिया।

परमीत सिंह धुरंधर

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