जीवन


मैं धीरे-धीरे,
धीरे-धीरे जो जवान हुआ,
कितनों ने राहें बदली, कितनों ने सलवार बदलीं।
मैं धीरे-धीरे,
धीरे-धीरे जो कुर्बान हुआ,
कितनों ने निगाहें बदली, कितनों ने आँगन बदलीं।
मैं धीरे-धीरे,
धीरे-धीरे जो धनवान हुआ,
कितनों ने रातें काटी, कितनों ने दांत काटी।
मैं धीरे-धीरे,
धीरे-धीरे जो परेशान हुआ,
कितनों ने ईमान बदली, कितनों ने पहचान बदली।

 

परमीत सिंह धुरंधर

साँसों का समुन्दर


तुझे यूँ ही अपनी साँसों का समुन्दर देता रहूँगा,
तू उछल तो एक लहार बन कर,
तुझे अपने किनारों की सारी जमीन दे दूंगा।

 

परमीत सिंह धुरंधर

तकिए पे कब तक करवट लोगी?


जिन्दा रहने के लिए,
एक मुलाकात जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
तेरी इस झुकी नजर के लिए,
मेरा पास आना जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
जब बिखरती हैं जुल्फें, तेरे चेहरे पे,
बढ़ जाती हैं तेरी साँसे।
इन साँसों की मंजिल के लिए,
मेरी साँसों का उठाना जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.
तकिए पे कब तक करवट लोगी?
मीठी नींद के लिए,
एक चुम्बन जरुरी है सनम.
जरुरी है सनम.

 

परमीत सिंह धुरंधर

ख्वाब


सैकड़ों हैं संसार में,
जो तुमपे निसार हो जाएँ।
हम तो बस आपका,
दीदारे-ख्वाब रखते हैं.
आपकी खूबसूरती का ऐसा,
आयाम है.
की हर रात पलकों में,
तुम्हारा ख्वाब रखते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर

प्रेम -मदिरा


प्रेम अदृश्य होता है,
पर, दृश्यों को बदल देता है.
जिन्हे नहीं पता,
पेड़ – पौधों की प्रजातियां।
फूल – पत्तियों को किताबों में,
वो भी संजोते हैं.
मदिरा दृश्य है,
पर, सबको अदृश्य कर देता है.
जिन्हे नहीं पता,
अक्षरों का, उनके मूल्यों का.
वो भी, मंदिरों में, समाज में,
मेले में, अमूल्य प्रवचन देते हैं.

 

परमीत सिंह धुरंधर