हमर सुकुमार देहिया पे ई पहाड़ भइल बा


पहलवान भइल बा सैयां हमार,
पहलवान भइल बा.
लूट अ ता खेत में आ,
दुआर पे धुंआधार भइल बा.
ना कोई आगे – पीछे जे पगहा बाँध दी,
खुल्लम -खुल्ला अब त ई साँढ़ भइल बा.
पहलवान भइल बा सैयां हमार,
पहलवान भइल बा.
दिन – रात खा ता हरियरी-पे – हरियरी,
सुखल भूसा पे मरखा भइल बा.
जाने का देख के बाबुल बाँध देहलन,
हमर सुकुमार देहिया पे ई पहाड़ भइल बा.
पहलवान भइल बा सैयां हमार,
पहलवान भइल बा.
टंकी सा चल जाइन, एने-ओने,
त उठा ले ता आसमा, जी के जंजाल भइल बा.
पहलवान भइल बा सैयां हमार,
पहलवान भइल बा.
लूट अ ता खेत में आ,
दुआर पे धुंआधार भइल बा.

 

परमीत सिंह धुरंधर

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