नैहर के खेल हो


हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के खेल हो,
माई कहत रहली बाबुल से एक रात,
की ई लड़की त हाथ से गईल निकल हो.
गऊअन के पंडित – मुल्ला, भड़स हमर पानी,
आ दर्जिया त सिये चोलिया बिना लेले मोल हो.
हमारा से सैया जी पुछि मत नैहर के हमर चाल हो,
रोजे नापी खेता – खेती, चौरा – चौरी, एक सांस में,
अइसन रखले रहनी अहिरन के छोरा संग मेल हो.
बहिना कहलस माई से एक रात हो,
की ए माई, दिदिया त आपन बारी बड़ी बिगड़ैल हो.

परमीत सिंह धुरंधर

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