लाल साड़ी


लाल साड़ी में आपको देख के,
दिल तो बईमान हो गया हैं.
हम ही अभी तक,
इस ईमान को थामे बैठे हैं.
ये जानते हुए की आप,
किसी और की हो रही हो,
जाने क्यों आपका आँचल पकड़े बैठे हैं.
जाने किस्मत में क्या लिखा है,
और आप कितना समझोगी,
मगर हर रात,
आपके लिए दिया बुझा के बैठे हैं.

परमीत सिंह धुरंधर

अमावस की रात


रहनुमाओं की खोज में, हसरतें जवाँ हो गयी,
जवानी के जोश में हम तनहा रह गए.
कब तक उछालोगे ये आज़ादी का जश्न,
सबको खबर हो चुकी है, ये रात हमें खोखला कर गयी.
और बेइंतहा मोहब्बत करते थे सितारों से हम,
अमावस की रात को, कत्ले-आम मच गयी.
अब ना हम हैं, ना वो हैं, ना जवानी का वो गुरुर,
मुफलसी है, तन्हाई है, और थोड़ी साँसे बच गयी.

परमीत सिंह धुरंधर

किस्मत


तेरी चाल पे तो तख्ते-ताज पलट गए,
ये हम हैं जो फिर भी संभल गए.
तुझे पाने को बाह गयी खून की नदियां,
जाने कैसे इस सैलाब से हम निकल गए.

परमीत सिंह धुरंधर