नगरिया चलल बा ये भोला


नगरिया चलल बा ये भोला,
डगरिया उठल बा ये भोला,
तहरे ही धाम अब ई रुकी,
भक्तन के टोला ये बाबा.
केहू के तन्वा में पीड़ा उठल बा,
केहू के मनवा में आंधी मचल बा,
सबके दिल के आस बा ,
तहरे दुअरिया पे बाबा .
अन्ख्वा के लोर त सुख गईल बा,
मनवा त अभी बैचेन बा,
कब तक आँचल ई एसे रही, सुखल आ खाली ये बाबा,
भर दिहिन अब त भक्तन के झोला ये बाबा.
आ व ना मान जा अब, पूरा कर अ परमित के कामना,
ताहरा से बढ़ के कें बाटे ये संसारिया में बाबा.
कभी-कभी त उठेला मनवा में हाम्रो आस हाँ,
तहरे से जुरल बा भक्तन के सारा ख्वाब हाँ,
अब त सुन के पुकार आँखवा त खोलीं ये बाबा,
ल देख अ आइल्बानी तहरे वोसरिया ये बाबा.
डगरिया भरल बा ये भोला,
नजरिया लागल बा ये भोला.
नगरिया……………..ये बाबा.

परमीत सिंह धुरंधर

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