साजिस


कभी वो हुस्न थी,
और मैं इश्क था
आज वो बेचैन हैं,
और मैं शांत सा.
कभी वो रात थी,
और मैं ख्वाब सा,
आज वो दरिया हैं,
और मैं सागर सा,
कि वक्त ने जब भी,
कि हैं मुझे तोड़ने कि साजिस,
मिट जाने से पहले,
मैं उठा हूँ परमीत लहरो सा.

परमीत और मेनका


वो रात भर मेरी बाँहों में,
रक्त का संचार बनी,
मेरे हृदय कि धड़कने,
मेरी साँसों कि रफ़्तार बनी.
इन काली-काली रातो में,
मेरे जीवन का आधार बनी.
उड़-उड़ के उनकी जुल्फे,
गिरती  हैं  मेरे मुखड़े पे,
आँचल ढाल कर उनके काँधे से,
लिपटा है मेरे सीने से,
मासूमियत से दूर,
वो मेरी मुस्कान बनी.
इन काली-काली रातो में,
मेरे जीवन का आधार बनी.
अधखुली पलकों से,
वो देखती हैं मेरे तन को,
अभी भी दबी,
अपने सरमोहया के बोझ से.
उनके योवन कि खामोसी,
मेरी जवानी कि चीत्कार बनी.
पल में वो दूर जाती,
पल में पास आ रही,
अपनी जुल्फो कि उलझन से,
खुद उलझती जा रही.
उनकी ये विवसता,
मेरा राजपूती अहंकार बनी.
न रोसनी कि चाहत,
न उची उड़ान कि,
लगता हैं प्यारा अब ये अंधकार,
उनकी जुल्फे मेरी पाश बनी,
लो टूट रहा मेरा ब्रह्मचर्य परमीत,
वो मेनका-अवतार बनी.

कुछ बैल सिर्फ म…


कुछ बैल सिर्फ मेलों में सजते है और वो बस नाद पे ही भातें हैं, और घर में दहेज़ लाने का काम करते है. वो कभी ना तो खेत में ही सज पाते है न ही खलिहान में. अब ये तो आप कि जावानी पे है कि आप कैसा बैल खरीदते हो, परमीत.

सर्वश्रेष्ठ-रिश्ते


मेरे बैलों कि जोड़ी बड़ी अनमोल है,
एक सीधा तो एक मुहजोड़ है.
बहते है दिन भर पछुआ में,
अरे ये तो बड़े बेजोड़ है.
देख के हल मेरे काँधे पे,
उछलने लगते है ये नाद पे.
अपने सींगों,
पे उखाड़ दे पहाड़ को,
ताकत में ये बेमिशाल हैं.
बहते हैं खेत में झूम -झूम के,
लौटते है घर को,
मिटटी उछाल-उछाल के,
मेरी जवानी के,
ये रिश्ते सर्वश्रेष्ठ हैं परमीत

गड़ासा प्यार में


लिए गड़ासा चल पड़ा हूँ प्यार में,
आज काट के लाऊंगा पूरी घांस रे,
फिर खाना मस्ती में मेरे बैलों,
लगाऊंगा हरियाली जब तुम्हारे नाद में.
इस गावं में या उस गावं में,
चाहे गुमेजी से या चंवर से,
पर लाऊंगा परमीत आज घांस मेरे बैलों,
फिर खाना मुँह डूबा के नाद में