प्यास


जला कर इस दिल को
बुझा ले अपनी प्यास।
न रहूँ फिर अगर मैं,
तो ये रख तो देगा,
पास होने का अहसास, परमीत.

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दर्द


दर्द में ही वो मेरी ना बनी,
खुशियों में मेरे जो दिए जलती थी.
अब सितारो का क्या करे भला परमीत,
मेरे आसमा पे जब वो ही न सजीं.

सचिन तेंदुलकर और मेरी जवानी


पलट-पलट के दे रहा था आस्ट्रलिया के गेंद्वाजों को,
और मैं जी रहा था सजते हुए अपने अरमानों को.
ज्यों-ज्यों उदय  हुआ क्रिकेट के आसमान पे भगवान् का,
मेरी जवानी ने ओढ़ा रंग राजपूती अहंकार का, परमित.

हवा


अनजान हैं कितने ही इस गुलिश्ता में,
चाँद तो सबका ही है दोस्तों ,
जिस दिन जावानी ढल जायेगी,
उतर आयेंगे किसी के आँगन में, दोस्तों.
ढलकता हैं आँचल रह-रह कर,
हवा ही कुछ इस कदर चल रही है,
जिस दिन तन भी ढलने लगेगा,
आँचल भी संभल लेंगे, परमित.